वर्षा ऋतु में उष्णोदक और आरोग्य अंबू का महत्व
नमस्कार साथियों,
जैसा कि वर्षा ऋतु का मौसम चल रहा है और पूरे भारत में श्रावण मास की स्थिति में उत्साह का वातावरण है। इस ऋतु में केवल खाद्य पदार्थों और जीवनशैली में ही परिवर्तन नहीं, बल्कि जल सेवन की विधि में भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
आयुर्वेद के अनुसार, मनुष्य के शरीर का लगभग 70% भाग जल से निर्मित है और यही जल हमारे स्वास्थ्य की नींव है। यदि हम जल को अग्नि संस्कार (उबालकर) सेवन करें तो यह साधारण पेय न होकर औषध का कार्य करता है। इस प्रकार पकाया गया जल उष्णोदक कहलाता है।
उष्णोदक की उपयोगिता
आयुर्वेद में कहा गया है कि उष्णोदक
कफ (श्लेष्म) के संघात को तोड़ता है,
वात दोष का अनुलोमन करता है,
और बरसात में मंद पड़ चुकी पाचन क्रिया को सक्रिय करता है।
वर्षा ऋतु में सामान्य जल भारी और पचने में कठिन माना जाता है। इसलिए उसे उबालकर सेवन करना स्वास्थ्यवर्धक रहता है।
पकाने की अवस्था अनुसार लाभ
1/4 शेष रहने तक उबाला हुआ जल: तीनों दोषों – वात, पित्त और कफ – के लिए हितकारी होता है।
1/2 शेष रहने तक उबाला हुआ जल: वात और पित्त के दोषों में संतुलनकारी।
3/4 शेष रहने तक उबाला हुआ जल: केवल वात दोष के लिए विशेष लाभकारी।
आरोग्य अंबू और वर्षा ऋतु
जब जल को एक चौथाई तक उबालकर सेवन किया जाता है तो इसे आरोग्य अंबू कहा जाता है। यह जल विशेष रूप से वर्षा ऋतु में उपयोगी है और इसमें अनेक गुण पाए जाते हैं:
ज्वर, सर्दी, खांसी और श्वास रोगों में हितकारी
शरीर के सूक्ष्म चैनलों की शुद्धि
शरीर में फैट की लिपोलिसिस (विघटन)
पोषण तत्त्वों का तीव्र वितरण
इस प्रकार, आरोग्य अंबू न केवल पाचन तंत्र को सक्रिय करता है बल्कि बदलते मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।
संदर्भ एवं शोध लिंक:
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